Wednesday, October 7, 2026
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JSSC-CGL की चयन सूची में ‘संदेह’! अब OMR शीट और CCTV से खुलेगा राज?

by उर्वशी शेखर
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झारखंड सामान्य स्नातक योग्यताधारी संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा यानी JSSC-CGL को लेकर विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। एक ओर इस पूरे प्रकरण की जांच CID स्तर पर जारी है, वहीं दूसरी ओर कुछ चयनित अभ्यर्थियों की नियुक्ति और परीक्षा प्रदर्शन को लेकर नए सवाल सामने आए हैं। परीक्षार्थियों के एक समूह ने कथित तौर पर संदिग्ध मामलों का विस्तृत संकलन तैयार कर इसे जांच एजेंसियों और संबंधित विभागों के संज्ञान में लाने की मांग की है।

अभ्यर्थियों द्वारा तैयार रिपोर्ट में रांची, साहिबगंज, जामताड़ा, चाईबासा, गुमला और चतरा समेत विभिन्न जिलों में पदस्थापित चयनित अभ्यर्थियों का उल्लेख किया गया है। इनमें प्रखंड कल्याण पदाधिकारी, असिस्टेंट सेक्शन ऑफिसर और अन्य पदों पर कार्यरत या अनुशंसित अभ्यर्थियों को लेकर संदेह जताया गया है।

रोल नंबर से लेकर पदस्थापन तक जुटाई गई जानकारी

रिपोर्ट में जिन अभ्यर्थियों को संदिग्ध बताया गया है, उनके परीक्षा रोल नंबर, वर्तमान पदस्थापन, गृह जिला और जन्मतिथि जैसी जानकारियां भी शामिल किए जाने का दावा किया गया है। रिपोर्ट तैयार करने वालों का कहना है कि सूची किसी अंतिम निष्कर्ष के तौर पर नहीं, बल्कि परीक्षार्थियों को उपलब्ध या दिखाई देने वाले कथित संदिग्ध पैटर्न के आधार पर तैयार की गई है।

अभ्यर्थियों ने स्पष्ट किया है कि सूची में नाम आना अपने आप में किसी व्यक्ति के खिलाफ अपराध सिद्ध नहीं करता। उनका आग्रह है कि संबंधित रिकॉर्ड और तकनीकी साक्ष्यों की जांच कर वास्तविक स्थिति सामने लाई जाए।

OMR, CCTV और बायोमेट्रिक डेटा की जांच की मांग

अभ्यर्थियों ने परीक्षा की निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए आयोग और सरकार से तकनीकी साक्ष्यों की विस्तृत जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि संदिग्ध मामलों में मूल OMR शीट, परीक्षा केंद्रों के CCTV फुटेज और बायोमेट्रिक उपस्थिति रिकॉर्ड का आपस में मिलान किया जाना चाहिए।

उनके मुताबिक, इन तीनों स्तरों पर उपलब्ध डेटा की जांच से यह स्पष्ट करने में मदद मिल सकती है कि संबंधित अभ्यर्थी परीक्षा में वास्तव में उपस्थित थे या नहीं और उनकी परीक्षा प्रक्रिया निर्धारित नियमों के अनुरूप रही या नहीं।

कई विभागों में पदस्थापित अभ्यर्थियों की जांच की मांग

रिपोर्ट में खाद्य एवं उपभोक्ता मामले निदेशालय, राजस्व, श्रम और कार्मिक विभाग से जुड़े पदों पर पदस्थापित या अनुशंसित अभ्यर्थियों के चयन रिकॉर्ड की भी पड़ताल की मांग की गई है।

अभ्यर्थियों का कहना है कि जिन रोल नंबर और मेधा क्रमांकों को लेकर संदेह व्यक्त किया गया है, उनके परीक्षा रिकॉर्ड, OMR, उपस्थिति, बायोमेट्रिक और चयन प्रक्रिया से जुड़े दस्तावेजों का स्वतंत्र रूप से सत्यापन होना चाहिए।

स्वतंत्र जांच एजेंसी से पड़ताल की मांग

मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए परीक्षार्थियों ने पूरी प्रक्रिया की विश्वसनीयता कायम रखने के लिए स्वतंत्र जांच एजेंसी से जांच कराने की मांग भी उठाई है। रिपोर्ट में आठ कथित संदिग्ध मामलों की विशेष जांच की मांग किए जाने की बात कही गई है।

अब निगाहें इस बात पर हैं कि CID और संबंधित विभाग इन आरोपों एवं उपलब्ध कराई गई सूची को किस तरह लेते हैं और क्या तकनीकी व दस्तावेजी साक्ष्यों की स्वतंत्र जांच शुरू होती है। फिलहाल इन अभ्यर्थियों के खिलाफ लगाए गए संदेह जांच का विषय हैं और किसी भी व्यक्ति की संलिप्तता जांच या न्यायिक प्रक्रिया में प्रमाणित होने के बाद ही स्थापित मानी जा सकती है।

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