Tuesday, October 6, 2026
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आदिवासी प्रतिनिधित्व और सांस्कृतिक विरासत का मुद्दा गरमाया, राज्यपाल से मिले आदिवासी प्रतिनिधि

by उर्वशी शेखर
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झारखंड में संभावित जनसंख्या-आधारित परिसीमन को लेकर आदिवासी समुदाय के राजनीतिक प्रतिनिधित्व पर पड़ने वाले संभावित प्रभाव का मुद्दा अब राजभवन तक पहुंच गया है। राज्य के पूर्व मंत्री बंधु तिर्की ने लोक भवन में राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार से मुलाकात कर इस विषय पर अपनी चिंता साझा की।

बैठक के दौरान तिर्की ने आशंका जताई कि यदि भविष्य में विधानसभा और लोकसभा क्षेत्रों का पुनर्निर्धारण केवल जनसंख्या के आधार पर किया जाता है, तो झारखंड में अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित सीटों की संख्या प्रभावित हो सकती है। उन्होंने राज्य के जनजातीय समुदाय के राजनीतिक अधिकारों और प्रतिनिधित्व की सुरक्षा को महत्वपूर्ण बताते हुए राज्यपाल से इस दिशा में आवश्यक पहल करने का आग्रह किया।

उन्होंने विशेष रूप से पांचवीं अनुसूची के अंतर्गत आने वाले क्षेत्रों का उल्लेख करते हुए कहा कि इन इलाकों में परिसीमन की प्रक्रिया तय करते समय केवल जनसंख्या का आंकड़ा ही आधार नहीं होना चाहिए। आदिवासी हितों, उनकी सामाजिक-सांस्कृतिक विशिष्टता और संविधान में दिए गए संरक्षण को भी समान महत्व दिया जाना जरूरी है।

वहीं, राज्यपाल से आदिवासी भूमिज मुण्डा युवा संगठन, चांडिल के प्रतिनिधिमंडल ने भी मुलाकात की। संगठन के अध्यक्ष रवीन्द्र सिंह सरदार के नेतृत्व में पहुंचे प्रतिनिधिमंडल ने चांडिल डैम के जलाशय से जुड़े पारंपरिक आदिवासी अधिकारों और सामाजिक भागीदारी से संबंधित विषय राज्यपाल के समक्ष रखे।

प्रतिनिधिमंडल ने भूमिज-मुंडा समाज की पारंपरिक व्यवस्थाओं और सांस्कृतिक विरासत से जुड़े हड़शाली एवं मेगालिश के संरक्षण की जरूरत पर भी ध्यान आकर्षित किया। संगठन की ओर से इन परंपराओं को सुरक्षित रखने और उनके विकास के लिए आवश्यक कदम उठाने का अनुरोध किया गया।

दोनों मुलाकातों में अलग-अलग मुद्दे उठाए गए, लेकिन केंद्र में जनजातीय समुदाय के अधिकार, प्रतिनिधित्व और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण की चिंता रही। प्रतिनिधिमंडलों ने राज्यपाल से संवैधानिक प्रावधानों और आदिवासी हितों के अनुरूप आवश्यक कार्रवाई की उम्मीद जताई।

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