JSSC CGL भर्ती से जुड़े कथित फर्जीवाड़े की जांच के बीच आरोपी अभय तिवारी की पत्नी सुषमा कुमारी और भाई अक्षय तिवारी की जमानत याचिका पर मंगलवार को अदालत में लंबी सुनवाई हुई। अपर न्यायायुक्त योगेश कुमार की अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है।
जमानत के लिए सुषमा कुमारी और अक्षय तिवारी ने 28 अगस्त को अदालत का रुख किया था। उनकी ओर से अधिवक्ता इंद्रजीत सिंह, अमितेश कुमार और अधिवक्ता सचिन कुमार ने पक्ष रखा। वहीं, मामले में सीआईडी पहले ही दोनों आरोपियों को रिमांड पर लेकर पूछताछ कर चुकी है।
18 अगस्त को हुई थी गिरफ्तारी
सीआईडी ने जांच के क्रम में सुषमा कुमारी और अक्षय तिवारी को 18 अगस्त को गिरफ्तार किया था। इसके बाद दोनों से कथित भर्ती फर्जीवाड़े में उनकी भूमिका और अभय तिवारी से जुड़े संभावित कनेक्शन को लेकर पूछताछ की गई।

जांच के केंद्र में अभय तिवारी भी है, जो गोड्डा जिले में खाद्य आपूर्ति विभाग में पदस्थापित था। बताया जा रहा है कि वह परीक्षा आयोजित करने वाली एजेंसी TDPL में मार्केटिंग मैनेजर के पद पर काम कर चुका है।
TDPL से जुड़ाव ने बढ़ाया शक
जांच एजेंसियों के मुताबिक, TDPL में कार्यरत रहने के दौरान अभय तिवारी ने JPSC और JSSC से संबंधित कई परीक्षाएं उत्तीर्ण की थीं। इसी कड़ी में उस पर अपनी पत्नी, भाई और अन्य परिजनों को कथित तौर पर परीक्षा एवं नियुक्ति प्रक्रिया में फर्जीवाड़े के जरिए लाभ पहुंचाने के आरोप हैं।
अब अदालत के फैसले पर सुषमा कुमारी और अक्षय तिवारी की कानूनी स्थिति काफी हद तक निर्भर करेगी। वहीं, सीआईडी की जांच में यह स्पष्ट करने की कोशिश जारी है कि कथित भर्ती घोटाले में अभय तिवारी और उसके परिवार के सदस्यों की भूमिका किस स्तर तक थी।