Wednesday, October 7, 2026
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JPSC कथित घोटाले में 7 संदिग्धों की तलाश तेज, डिजिटल सुरागों से खंगाला जा रहा नेटवर्क

by उर्वशी शेखर
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झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और मेधा घोटाले की जांच अब एक नए चरण में पहुंच गई है। पूर्व JPSC अध्यक्ष एल. खियांग्ते समेत 20 आरोपितों की गिरफ्तारी के बाद CID ने अब उन सात संदिग्धों पर फोकस किया है, जिनकी भूमिका जांच के दौरान सामने आई है और जो फिलहाल एजेंसी की पकड़ से बाहर हैं।

जांच एजेंसी ने पिछले पांच दिनों में इन संदिग्धों से जुड़े संभावित ठिकानों पर कई बार छापेमारी की, लेकिन अब तक किसी को पकड़ा नहीं जा सका है। बताया जा रहा है कि यदि संदिग्ध जल्द जांच में शामिल नहीं होते हैं तो CID विशेष अदालत से गिरफ्तारी वारंट हासिल करने की प्रक्रिया शुरू कर सकती है। इसके बाद भी गिरफ्तारी नहीं होने पर उनकी संपत्ति की कुर्की-जब्ती की कार्रवाई की दिशा में आगे बढ़ने की संभावना है।

यह कार्रवाई CID थाना कांड संख्या 16/2026 के तहत चल रही जांच का हिस्सा है। गिरफ्तार आरोपितों से पूछताछ, दस्तावेजों की पड़ताल और तकनीकी साक्ष्यों के विश्लेषण के दौरान सात नए संदिग्धों के नाम सामने आने की जानकारी है। इनमें आदित्य पांडेय (नामकुम), पवन कुमार सिंह (टाटीसिलवे), रविशंकर कुमार और संतोष कुमार सिंह (पलामू), सानन्द प्रकाश (बोकारो), लालू कुमार यादव (हजारीबाग) और सौरभ कुमार पांडेय (गिरिडीह) शामिल हैं।

CID को प्रारंभिक जांच में इन लोगों के परीक्षा प्रक्रिया में कथित हस्तक्षेप, प्रश्नपत्र लीक, OMR में छेड़छाड़, अवैध आर्थिक लेन-देन और अभ्यर्थियों को कथित रूप से अनुचित तरीके से परीक्षा में सफलता दिलाने से जुड़े संकेत मिलने की बात सामने आई है। हालांकि, इन आरोपों पर अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही निकलेगा।

मोबाइल से संपर्कों की कड़ी जोड़ रही जांच एजेंसी

CID अब सिर्फ आरोपितों की गिरफ्तारी तक सीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि कथित परीक्षा नेटवर्क की पूरी संरचना सामने लाने की कोशिश कर रही है। इसके लिए जब्त मोबाइल फोन और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का फोरेंसिक परीक्षण कराया जा रहा है।

कॉल डिटेल रिकॉर्ड और डिजिटल गतिविधियों की पड़ताल के जरिए यह पता लगाया जा रहा है कि परीक्षा से पहले किन-किन लोगों के बीच संपर्क हुआ था। जांच का एक अहम पहलू यह भी है कि कथित तौर पर प्रश्न और उत्तर उपलब्ध कराने वाला नेटवर्क कितने लोगों तक फैला था।

विनय शाह और अनीश कुमार से संबंधित दस्तावेजों की भी जांच की जा रही है। उनके पहचान दस्तावेजों के आधार पर जारी सिम कार्डों का विवरण खंगाला जा रहा है, ताकि यह पता चल सके कि उनके नाम पर किसी अन्य मोबाइल नंबर का इस्तेमाल तो नहीं हुआ। CID को आशंका है कि जांच से बचने के लिए अलग-अलग नंबरों का इस्तेमाल किया गया हो सकता है।

आसनसोल से काठमांडू तक संदिग्ध ठिकानों की पड़ताल

जांच का दायरा झारखंड तक सीमित नहीं है। प्राथमिकी और अब तक सामने आए बयानों के आधार पर उन स्थानों की भी जांच की जा रही है, जहां परीक्षा से पहले कुछ अभ्यर्थियों के पहुंचने की बात सामने आई है।

इनमें आसनसोल का सिंधी होटल, नियामतपुर का एक विवाह भवन, मुजफ्फरपुर, रांची, मांडू, दिल्ली और नेपाल की राजधानी काठमांडू शामिल हैं। आरोप है कि परीक्षा से कुछ दिन पहले अभ्यर्थियों को इन स्थानों पर ले जाकर कथित तौर पर प्रश्नों और उत्तरों की तैयारी कराई गई थी।

CID अब इन जगहों का भौतिक सत्यापन करने के साथ वहां से मिलने वाले संभावित साक्ष्यों को भी जांच में शामिल कर रही है। इससे कथित नेटवर्क के संचालन और उससे जुड़े लोगों की भूमिका स्पष्ट करने में मदद मिलने की उम्मीद है।

JSSC CGL के पुराने सुराग भी फिर खंगाले जा रहे

JPSC मामले की जांच के साथ CID ने JSSC CGL परीक्षा से जुड़े पुराने बिंदुओं की भी दोबारा समीक्षा शुरू कर दी है। अक्टूबर 2025 की केस डायरी में दर्ज 12 महत्वपूर्ण और तकनीकी बिंदुओं को फिर से जांच के दायरे में लिया गया है।

अब जांच का फोकस केवल परीक्षा में कथित गड़बड़ी करने वालों की पहचान तक सीमित नहीं है। एजेंसी यह भी पता लगाने में जुटी है कि पूरे नेटवर्क का संचालन कौन कर रहा था, आर्थिक लेन-देन की कड़ियां किन लोगों तक पहुंचीं और अभ्यर्थियों को कथित लाभ पहुंचाने की व्यवस्था किस स्तर पर और किस तरीके से संचालित होती थी।

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