Thursday, October 8, 2026
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हाउसहोल्ड सर्वे में बड़ी लापरवाही! झारखंड के 2470 शिक्षकों और 56 अधिकारियों को नोटिस जारी

by उर्वशी शेखर
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झारखंड में स्कूल से बाहर बच्चों को चिह्नित कर उन्हें दोबारा शिक्षा व्यवस्था से जोड़ने के उद्देश्य से चलाया जा रहा हाउसहोल्ड सर्वे विभागीय स्तर पर सवालों के घेरे में आ गया है। राज्य के 14 जिलों में 1322 स्कूल ऐसे पाए गए हैं, जहां तय अवधि में सर्वे पूरा नहीं हो सका। इनमें 870 स्कूलों में सर्वे की शुरुआत तक नहीं हुई, जबकि 452 स्कूलों में काम शुरू होने के बाद बीच में ही रुक गया।

सर्वे की धीमी रफ्तार को गंभीरता से लेते हुए राज्य परियोजना निदेशक शशि रंजन ने अब संबंधित शिक्षकों और अधिकारियों की जवाबदेही तय कर दी है। इस मामले में 2470 शिक्षकों के साथ 56 अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। नोटिस पाने वाले अधिकारियों में जिला शिक्षा अधीक्षक, एसीपी, आउट ऑफ स्कूल प्रभाग के प्रभारी और एसएमसी प्रभाग के प्रभारी शामिल हैं। सभी को 28 सितंबर तक अपना पक्ष रखने का निर्देश दिया गया है। समय पर जवाब नहीं देने वालों के खिलाफ वेतन रोकने जैसी कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।

दुमका में सबसे ज्यादा स्कूल सर्वे से बाहर

जिलेवार आंकड़ों में दुमका की स्थिति सबसे अधिक चिंताजनक सामने आई है। यहां 535 स्कूलों में सर्वे निर्धारित समय तक पूरा नहीं हो पाया। इसके बाद पलामू के 379 और पाकुड़ के 140 स्कूल हैं।

अन्य जिलों में देवघर के 57, गोड्डा के 51, गिरिडीह के 45 और लोहरदगा के 34 स्कूलों में सर्वे लंबित है। साहिबगंज में 30, पश्चिमी सिंहभूम में 27, गुमला में नौ और खूंटी में सात स्कूलों का काम अधूरा है। वहीं लातेहार के चार तथा धनबाद और गढ़वा के दो-दो स्कूलों में भी सर्वे पूरा नहीं किया जा सका।

1930 शिक्षकों ने शुरू ही नहीं किया सर्वे

विभागीय आंकड़ों के अनुसार कुल 2470 शिक्षक सर्वे के लक्ष्य को पूरा करने में विफल रहे हैं। इनमें 1930 शिक्षकों ने सर्वे की शुरुआत ही नहीं की, जबकि 540 शिक्षक ऐसे हैं जिन्होंने प्रक्रिया शुरू करने के बाद उसे पूरा नहीं किया।

शिक्षकों की संख्या के लिहाज से भी दुमका सबसे आगे है, जहां 1027 शिक्षक सर्वे पूरा नहीं कर पाए। पलामू में 722 और पाकुड़ में 278 शिक्षक इस सूची में शामिल हैं।

अगस्त में भी मांगा गया था जवाब

सर्वे की प्रगति को लेकर विभाग पहले भी जिलों को चेतावनी दे चुका है। 27 अगस्त को राज्य कार्यालय की ओर से धीमी प्रगति पर जिलों से स्पष्टीकरण मांगा गया था। हालांकि उपलब्ध जानकारी के मुताबिक रांची को छोड़कर किसी अन्य जिले के जिला शिक्षा अधीक्षक की ओर से जवाब नहीं दिया गया।

इसके बाद विभाग ने मामले को आगे बढ़ाते हुए इस बार सीधे संबंधित अधिकारियों और शिक्षकों की जिम्मेदारी तय कर उन्हें शोकॉज जारी किया है।

सर्वे के बाद बच्चों को स्कूल से जोड़ने की चुनौती

हाउसहोल्ड सर्वे का उद्देश्य केवल स्कूल से बाहर बच्चों की पहचान करना नहीं है। सर्वे के बाद चिह्नित बच्चों को दोबारा स्कूल में दाखिला दिलाने और शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने की जिम्मेदारी भी संबंधित स्तर पर तय की गई है। इसके लिए एसएमसी और पीटीएम की भूमिका महत्वपूर्ण मानी गई है।

हालांकि बैठकों के बावजूद ड्रॉप बॉक्स में दर्ज बच्चों और पहले से चिह्नित स्कूल से बाहर बच्चों की सूची पर अपेक्षित स्तर पर चर्चा नहीं हो सकी। अभिभावकों से संपर्क कर बच्चों को फिर से स्कूल भेजने की प्रक्रिया भी पर्याप्त गति नहीं पकड़ पाई।

राज्य परियोजना निदेशक ने स्पष्ट किया है कि स्कूल से बाहर बच्चों की सही संख्या और उनकी स्थिति जानने के लिए घर-घर सर्वे बेहद महत्वपूर्ण है। ऐसे में सर्वे में देरी को महज प्रशासनिक प्रगति की कमी मानने के बजाय संबंधित अधिकारियों और शिक्षकों की जिम्मेदारी तय करते हुए अभियान को निर्धारित समय में पूरा कराने पर जोर दिया गया है।

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