Tuesday, October 6, 2026
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SIR पर ओवैसी का बड़ा आरोप, Form-7 को लेकर चुनाव आयोग से शिकायत; बोले- नहीं रुका मामला तो होगा बड़ा आंदोलन

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हैदराबाद से AIMIM सांसद और पार्टी प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान नाम हटाने की प्रक्रिया को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। ओवैसी का आरोप है कि कुछ स्थानों पर Form-7 का इस्तेमाल करके मतदाताओं के नाम सूची से हटाने की कोशिश की जा रही है और इस प्रक्रिया में नियमों की अनदेखी की जा रही है।

ओवैसी के मुताबिक, उन्हें ऐसी शिकायतें मिली हैं जिनमें पहले से भरे हुए Form-7 जमा किए जाने की बात सामने आई है। इन प्रपत्रों में जिस मतदाता का नाम सूची से हटाने की मांग की गई है, उसकी जानकारी दर्ज है, लेकिन आवेदन प्रस्तुत करने वाले व्यक्ति का नाम और आवश्यक विवरण कथित तौर पर मौजूद नहीं है। उन्होंने इसे गंभीर मामला बताते हुए कहा कि यदि इस तरह से प्रपत्र दाखिल किए जा रहे हैं तो निर्वाचन प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठना स्वाभाविक है।

चुनाव अधिकारियों से जांच और कार्रवाई की मांग

AIMIM प्रमुख ने चुनाव आयोग से पूरे मामले का संज्ञान लेने की अपील की है। उन्होंने तेलंगाना के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी और संबंधित जिला निर्वाचन अधिकारियों को भी ऐसी शिकायतों की जानकारी देने की बात कही है।ओवैसी ने मांग की कि मतदाता सूची से नाम हटाने के लिए दाखिल किए जा रहे Form-7 की जांच की जाए और यदि किसी व्यक्ति ने गलत या फर्जी तरीके से आवेदन किया है तो उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई हो। उनका कहना है कि नाम हटाने की प्रक्रिया में किसी भी तरह की अनियमितता को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।

उन्होंने चेतावनी दी कि यदि कथित तौर पर गलत तरीके से Form-7 दाखिल करने की गतिविधि पर रोक नहीं लगती है तो हैदराबाद में बड़े स्तर पर विरोध-प्रदर्शन हो सकते हैं। ओवैसी ने कहा कि ऐसी स्थिति पैदा होने पर उनकी पार्टी पीछे नहीं हटेगी।

UP चुनाव को लेकर गठबंधन के संकेत

ओवैसी ने हाल में उत्तर प्रदेश के आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर भी अपनी पार्टी की रणनीति पर बात की। उन्होंने संकेत दिया कि AIMIM बीजेपी को सत्ता में लौटने से रोकने के लिए दूसरे राजनीतिक दलों के साथ चुनावी समझौते पर विचार कर सकती है।उनका कहना है कि उनकी पार्टी का उद्देश्य उत्तर प्रदेश में बीजेपी को लगातार तीसरी बार सरकार बनाने से रोकना है। इसी संदर्भ में उन्होंने अन्य दलों के साथ गठबंधन की संभावना से इनकार नहीं किया।

बिहार में विधायकों के दलबदल का मुद्दा भी उठाया

ओवैसी ने बिहार का उदाहरण देते हुए AIMIM के साथ हुए राजनीतिक घटनाक्रम का भी जिक्र किया। उन्होंने दावा किया कि उनकी पार्टी के चार विधायक दूसरे राजनीतिक खेमे में चले गए थे और उस समय AIMIM ने विधानसभा चुनाव में सीमित सीटों की मांग की थी।

उन्होंने शिवसेना में हुए विभाजन को लेकर उठाए गए लोकतंत्र संबंधी सवालों से इसकी तुलना करते हुए कहा कि AIMIM के विधायकों के साथ हुए घटनाक्रम पर राजनीतिक स्तर पर वैसी प्रतिक्रिया नहीं दिखाई गई। इसके बावजूद, उनके मुताबिक, पार्टी ने दोबारा चुनाव लड़ा और जनता के समर्थन से बिहार में पांच सीटें हासिल कीं।

ओवैसी के बयानों से स्पष्ट है कि AIMIM एक ओर SIR के दौरान मतदाता सूची से नाम हटाने की प्रक्रिया पर कड़ी निगरानी की मांग कर रही है, वहीं दूसरी ओर आगामी विधानसभा चुनावों में बीजेपी के खिलाफ व्यापक विपक्षी रणनीति की संभावना भी तलाश रही है।

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