Tuesday, October 6, 2026
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पंजाब कांग्रेस की कमान परगट सिंह के हाथ, 2027 से पहले गुटबाजी खत्म करने की चुनौती

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पंजाब कांग्रेस के नए प्रदेश अध्यक्ष परगट सिंह ने सोमवार को पार्टी की शीर्ष नेतृत्व से मुलाकात कर अपनी नई जिम्मेदारी की शुरुआत की। उन्होंने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे से मुलाकात की। 61 वर्षीय परगट सिंह को ऐसे समय प्रदेश संगठन की कमान सौंपी गई है, जब कांग्रेस 2027 के विधानसभा चुनाव में पंजाब की सत्ता में वापसी की तैयारी कर रही है।

उनकी नियुक्ति को पार्टी के भीतर अलग-अलग गुटों के बीच बेहतर तालमेल कायम करने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। परगट सिंह के पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी और नवजोत सिंह सिद्धू, दोनों से राजनीतिक संबंध रहे हैं। यही समीकरण उन्हें संगठन के भीतर संवाद बढ़ाने और लंबे समय से चले आ रहे मतभेदों को कम करने के लिए महत्वपूर्ण बनाता है।

सिद्धू के करीबी, चन्नी सरकार में मंत्री

परगट सिंह और नवजोत सिंह सिद्धू का साथ कांग्रेस में आने से पहले का है। दोनों ने शिरोमणि अकाली दल छोड़ने के बाद ‘आवाज-ए-पंजाब’ मोर्चे के गठन में साथ काम किया और बाद में कांग्रेस में शामिल हुए। सिद्धू के पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष रहते परगट सिंह उनके करीबी सहयोगियों में रहे।चरणजीत सिंह चन्नी के मुख्यमंत्री बनने के बाद परगट सिंह उनकी सरकार में मंत्री भी रहे। उन्हें उच्च शिक्षा, स्कूल शिक्षा और खेल से जुड़े विभागों की जिम्मेदारी मिली। उस दौर में सरकार और संगठन के बीच मतभेद सामने आने पर उन्होंने चन्नी और सिद्धू के बीच संवाद कायम करने की कोशिश की थी।

परगट सिंह के सामाजिक संपर्कों में सिद्धू मूसे वाला का परिवार भी शामिल है। पार्टी को उम्मीद है कि उनके व्यापक राजनीतिक रिश्ते संगठन में समन्वय बढ़ाने में मदद करेंगे।

जालंधर कैंट से लगातार तीन बार जीत

परगट सिंह ने अपने चुनावी सफर की शुरुआत 2012 में शिरोमणि अकाली दल के उम्मीदवार के तौर पर की थी। जालंधर कैंट विधानसभा सीट से जीतने के बाद उन्होंने 2017 में कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ा और फिर सफलता हासिल की। 2022 में आम आदमी पार्टी की मजबूत लहर के बीच भी उन्होंने इसी सीट से जीत दर्ज की और लगातार तीसरी बार विधायक बने।

2022 का चुनाव उनके लिए खास तौर पर महत्वपूर्ण रहा, क्योंकि उन्होंने करीब 5,800 मतों के अंतर से सीट बरकरार रखी। इससे क्षेत्र में उनकी व्यक्तिगत राजनीतिक पकड़ भी सामने आई।

अब प्रदेश अध्यक्ष के रूप में उनके सामने सिर्फ संगठन को चुनावी तौर पर मजबूत करने की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि कांग्रेस के भीतर अलग-अलग नेताओं और गुटों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना भी बड़ी चुनौती है। पार्टी को 2027 में सत्ता में वापसी की उम्मीद है और इसके लिए मजबूत संगठन उसकी रणनीति का अहम हिस्सा होगा।

हॉकी से राजनीति तक का सफर

राजनीति में आने से पहले परगट सिंह भारतीय हॉकी के प्रमुख खिलाड़ियों में शामिल रहे हैं। 5 मार्च 1965 को जालंधर के मीठापुर में जन्मे परगट सिंह ने अंतरराष्ट्रीय हॉकी में भारत का प्रतिनिधित्व किया और ओलंपिक स्तर पर भी देश का नाम रोशन किया।1985 की चैंपियंस ट्रॉफी में जर्मनी के खिलाफ मुकाबले में उनके प्रदर्शन ने उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खास पहचान दिलाई। खेल के मैदान से राजनीति तक पहुंचे परगट सिंह की नेतृत्व क्षमता अब पंजाब कांग्रेस को एकजुट करने की परीक्षा से गुजरेगी।प्रदेश अध्यक्ष बनने के बाद उनकी शुरुआती गतिविधियों में पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह की पत्नी गुरशरण कौर से मुलाकात भी शामिल रही। इसे कांग्रेस की विरासत और वरिष्ठ नेतृत्व के प्रति सम्मान के संदेश के रूप में देखा गया।

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