Wednesday, October 7, 2026
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JMM के जमीनी कार्यकर्ता से कैबिनेट मंत्री तक… सुदिव्य सोनू की 37 साल की सियासी दास्तान

by उर्वशी शेखर
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झारखंड की राजनीति में संगठन के जमीनी कार्यकर्ता से सरकार के महत्वपूर्ण विभागों के मंत्री तक पहुंचे सुदिव्य कुमार सोनू का राजनीतिक सफर 6 सितंबर 2026 की सुबह अचानक समाप्त हो गया। गिरिडीह सदर से लगातार दो बार विधायक रहे सोनू ने करीब 37 वर्षों तक झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) के साथ सक्रिय राजनीति की। उनकी राजनीतिक यात्रा ऐसे दौर में शुरू हुई थी, जब झारखंड अलग राज्य नहीं बना था और अलग राज्य आंदोलन में JMM की अहम भूमिका थी।

सुदिव्य सोनू ने 1989 में JMM की प्राथमिक सदस्यता लेकर संगठनात्मक राजनीति की शुरुआत की। शुरुआती वर्षों में उन्होंने पार्टी के लिए जमीनी स्तर पर काम किया। पोस्टर लगाने, दीवार लेखन करने और गांव-गांव पार्टी का संगठन मजबूत करने जैसे कामों से आगे बढ़ते हुए उन्होंने गिरिडीह में अपनी राजनीतिक पहचान बनाई। 1992 में उन्हें गिरिडीह नगर JMM का संस्थापक अध्यक्ष बनाया गया। इसके बाद संगठन में विभिन्न जिम्मेदारियां निभाते हुए वह जिला स्तर पर पार्टी के प्रमुख चेहरों में शामिल हुए।

दो चुनावी हार के बाद भी नहीं छोड़ा मैदान

संगठन में करीब दो दशक बिताने के बाद सुदिव्य सोनू ने 2009 में पहली बार विधानसभा चुनाव लड़ा। JMM उम्मीदवार के तौर पर गिरिडीह सीट से उतरे, लेकिन जीत हासिल नहीं कर सके। वर्ष 2014 में उन्होंने दोबारा इसी सीट से चुनावी मैदान में उतरकर किस्मत आजमाई। इस बार भी उन्हें सफलता नहीं मिली और वह दूसरे स्थान पर रहे। भाजपा के निर्भय कुमार शाहाबादी ने चुनाव जीता।

लगातार दो चुनाव हारने के बावजूद सुदिव्य सोनू ने संगठन और क्षेत्र की राजनीति से अपना जुड़ाव बनाए रखा। यही निरंतरता आगे चलकर उनके लिए निर्णायक साबित हुई।

2019 में बदली तस्वीर, पहली बार विधानसभा पहुंचे

वर्ष 2019 में सुदिव्य सोनू ने तीसरी बार गिरिडीह सीट से चुनाव लड़ा। इस बार परिणाम उनके पक्ष में रहा। उन्होंने भाजपा के निर्भय कुमार शाहाबादी को पराजित कर पहली बार विधानसभा में प्रवेश किया।

इस चुनाव में सुदिव्य सोनू को 80,871 वोट मिले, जबकि निर्भय कुमार शाहाबादी के खाते में 64,987 वोट आए। करीब दस वर्षों के चुनावी संघर्ष के बाद मिली इस जीत ने उनके राजनीतिक जीवन को नया विस्तार दिया।

विधायक बनने के बाद क्षेत्रीय विकास और शिक्षा से जुड़े मुद्दे उनकी राजनीति के केंद्र में रहे। गिरिडीह में सर जेसी बोस विश्वविद्यालय की स्थापना, पीरटांड़ क्षेत्र में सिंचाई परियोजना तथा मेडिकल और इंजीनियरिंग कॉलेज जैसे प्रस्तावों को लेकर उन्होंने सक्रियता दिखाई। इन योजनाओं की उपलब्धि और क्रियान्वयन का आकलन अलग विषय है, लेकिन शिक्षा और आधारभूत ढांचे से जुड़े मुद्दे उनके राजनीतिक एजेंडे का हिस्सा रहे।

2024 में फिर जीते, पहली बार बने मंत्री

2024 के विधानसभा चुनाव में सुदिव्य सोनू के सामने एक बार फिर भाजपा के निर्भय कुमार शाहाबादी थे। इस बार मुकाबला बेहद करीबी रहा। सोनू को 94,042 वोट मिले, जबकि शाहाबादी को 90,204 वोट प्राप्त हुए। यानी महज 3,838 मतों के अंतर से उन्होंने चुनाव जीतकर लगातार दूसरी बार विधानसभा में अपनी जगह बनाई।

दोबारा विधायक बनने के बाद उन्हें हेमंत सोरेन सरकार में कैबिनेट मंत्री बनाया गया। उनके पास उच्च एवं तकनीकी शिक्षा के साथ नगर विकास एवं आवास, पर्यटन, कला-संस्कृति तथा खेलकूद एवं युवा कार्य जैसे महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी आई।

गिरिडीह के राजनीतिक इतिहास में भी यह उपलब्धि अहम रही। JMM के टिकट पर गिरिडीह विधानसभा क्षेत्र से चुनाव जीतकर कैबिनेट मंत्री बनने वाले सुदिव्य सोनू पहले नेता बने।

छात्र आंदोलन में सरकार और छात्रों के बीच बने अहम कड़ी

मंत्री के रूप में उनका एक महत्वपूर्ण राजनीतिक हस्तक्षेप 2026 में JPSC और JSSC की परीक्षाओं तथा भर्ती प्रक्रियाओं को लेकर हुए छात्र आंदोलनों के दौरान देखने को मिला। उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग की जिम्मेदारी उनके पास होने के कारण वह छात्रों के साथ सरकार की बातचीत में प्रमुख भूमिका में रहे।

परीक्षाओं को लेकर छात्रों की मांग, परीक्षा स्थगित करने, रद्द करने और अनियमितताओं की जांच जैसे मुद्दों पर सरकार का पक्ष रखने के लिए उन्होंने आंदोलनकारियों से संवाद किया। इस दौरान वह सरकार और छात्रों के बीच बातचीत की प्रक्रिया में एक प्रमुख चेहरा बनकर सामने आए।

6 सितंबर की सुबह खत्म हुआ राजनीतिक सफर

सुदिव्य कुमार सोनू के निधन की खबर 6 सितंबर 2026 की सुबह सामने आई। उपलब्ध शुरुआती जानकारी के मुताबिक देर रात गिरिडीह स्थित आवास पर उनकी तबीयत अचानक बिगड़ी और सीने में दर्द की शिकायत के बाद परिजन उन्हें मर्सी अस्पताल ले गए। अस्पताल में इलाज के दौरान सुबह करीब 4 बजे उनका निधन हो गया।

उनकी उम्र को लेकर शुरुआती रिपोर्टों में अलग-अलग जानकारी सामने आई, लेकिन उनके राजनीतिक सफर के प्रमुख पड़ाव स्पष्ट हैं। 1989 में JMM की प्राथमिक सदस्यता से शुरू हुआ सफर 1992 में नगर संगठन की जिम्मेदारी, दो विधानसभा चुनावों में हार, 2019 में पहली चुनावी जीत और 2024 में लगातार दूसरी जीत के बाद कैबिनेट मंत्री बनने तक पहुंचा।

37 साल की यात्रा के प्रमुख पड़ाव

1989: JMM की प्राथमिक सदस्यता लेकर सक्रिय राजनीति में प्रवेश।
1992: गिरिडीह नगर JMM के संस्थापक अध्यक्ष बने।
2009: पहली बार गिरिडीह से विधानसभा चुनाव लड़ा, लेकिन हार मिली।
2014: दूसरी बार चुनाव मैदान में उतरे, इस बार भी जीत नहीं मिली।
2019: तीसरे प्रयास में भाजपा के निर्भय कुमार शाहाबादी को हराकर पहली बार विधायक बने।
2024: गिरिडीह से लगातार दूसरी बार चुनाव जीते और हेमंत सोरेन सरकार में कैबिनेट मंत्री बने।
2026: JPSC-JSSC से जुड़े छात्र आंदोलन के दौरान सरकार और छात्रों के बीच संवाद में अहम भूमिका निभाई।
6 सितंबर 2026: आकस्मिक निधन के साथ 37 वर्ष लंबा राजनीतिक सफर समाप्त हो गया।

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