Wednesday, October 7, 2026
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2018 की मुलाकात के दावे पर सांसद निशिकांत दुबे का पलटवार, पूर्व वित्त सचिव सुभाष गर्ग से मांगे सबूत

by उर्वशी शेखर
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गोड्डा से भाजपा सांसद निशिकांत दुबे और पूर्व वित्त सचिव सुभाष चंद्र गर्ग के बीच विवाद अब कानूनी मोड़ लेता दिख रहा है। गर्ग के उस दावे पर दुबे ने कड़ी आपत्ति जताई है, जिसमें उन्होंने 2018 में सांसद के अपने कार्यालय आने और मुलाकात करने की बात कही थी। दुबे ने इस दावे को सार्वजनिक रूप से साबित करने की चुनौती देते हुए कहा है कि प्रमाण नहीं देने की स्थिति में गर्ग को माफी मांगनी होगी।

दुबे के मुताबिक, 2009 में सांसद बनने के बाद से उन्होंने दिल्ली में केंद्र सरकार के किसी सचिव के कार्यालय में जाकर मुलाकात नहीं की है। उनका कहना है कि सांसद और सचिव के बीच निर्धारित प्रोटोकॉल को देखते हुए वह अधिकारियों को अपने पास बुलाने की स्थिति में रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि यदि गर्ग यह साबित कर दें कि वह कभी उनके कार्यालय गए थे, तो वह उनके आरोप को स्वीकार करने के लिए तैयार हैं।

ट्रांसफर-पोस्टिंग के आरोप पर भी सवाल

विवाद केवल कथित मुलाकात तक सीमित नहीं है। गर्ग ने अपने एक हालिया बयान में 2018 की उस कथित मुलाकात का संदर्भ देते हुए कहा था कि दुबे ने कुछ मामलों में हस्तक्षेप करने और काम कराने की बात कही थी। रिपोर्टों के अनुसार, गर्ग ने ट्रांसफर और कॉन्ट्रैक्ट से जुड़े मामलों का भी जिक्र किया था। दुबे ने इन दावों को भी खारिज करते हुए कहा है कि यदि उनके द्वारा कभी किसी अधिकारी को ट्रांसफर-पोस्टिंग से संबंधित पत्र लिखा गया हो, तो उसे सार्वजनिक किया जाए।

सांसद ने यह भी कहा कि जिस दौर की घटना का जिक्र किया जा रहा है, उस समय वह संसद की पब्लिक अकाउंट्स कमेटी से जुड़े महत्वपूर्ण पद पर थे। उनके अनुसार, संसदीय समिति के अध्यक्ष के तौर पर अधिकारियों को बुलाने का अधिकार उनके पास था। इसलिए किसी सचिव के कार्यालय जाकर निजी तौर पर मुलाकात करने के दावे को लेकर उन्होंने गर्ग से प्रमाण मांगा है।

GDP विवाद के बीच बढ़ा टकराव

दुबे और गर्ग के बीच यह ताजा विवाद ऐसे समय सामने आया है, जब पूर्व वित्त सचिव हाल में देश की आर्थिक वृद्धि के आंकड़ों को लेकर सार्वजनिक बहस का हिस्सा बने थे। गर्ग ने सरकार द्वारा बताए गए 7.8 प्रतिशत जीडीपी वृद्धि दर के आंकड़े पर सवाल उठाए थे। इसी पृष्ठभूमि में 2018 के पुराने घटनाक्रम और दुबे के तत्कालीन पत्रों का भी दोबारा उल्लेख सामने आया।

उपलब्ध सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार, 2018 में सुभाष चंद्र गर्ग आर्थिक मामलों के विभाग के सचिव थे। बाद में मार्च 2019 में उन्हें वित्त सचिव बनाया गया था।

दुबे ने दी कानूनी कार्रवाई की चेतावनी

दुबे ने सोशल मीडिया पर अपनी प्रतिक्रिया में कहा कि गर्ग के दावे को प्रमाणित किया जाना चाहिए। उनका कहना है कि यदि आरोपों के समर्थन में कोई ठोस प्रमाण सामने नहीं आता है, तो उन्हें सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी होगी। सांसद ने यह भी कहा है कि उन्होंने पूर्व वित्त सचिव के खिलाफ आपराधिक मानहानि की कार्रवाई शुरू की है।

इस पूरे मामले में फिलहाल दोनों पक्षों के दावे एक-दूसरे से अलग हैं। गर्ग ने कथित मुलाकात और उससे जुड़े घटनाक्रम का उल्लेख किया है, जबकि दुबे ने मुलाकात से इनकार करते हुए उसके प्रमाण की मांग की है। विवाद अब सार्वजनिक बयानबाजी से आगे बढ़कर कानूनी प्रक्रिया तक पहुंच गया है।

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