दिल्ली में करीब 700 करोड़ रुपये के कथित मेडिकल उपकरण खरीद घोटाले की जांच के बीच एंटी करप्शन ब्रांच (ACB) ने आरोपी राजीव रंगीला को गिरफ्तार कर लिया है। 50 वर्षीय रंगीला ने गुरुवार को जांच एजेंसी के समक्ष आत्मसमर्पण किया था। अधिकारियों के मुताबिक, वह जून से जांच एजेंसी की पकड़ से बाहर था और उसके अमेरिका चले जाने की जानकारी भी सामने आई थी। शुक्रवार को उसे अदालत में पेश किया गया, जहां से पूछताछ के लिए चार दिन की पुलिस हिरासत मंजूर की गई।कौन है राजीव रंगीला?ईस्ट दिल्ली निवासी राजीव रंगीला फार्मास्यूटिकल कारोबार से जुड़ा बताया जाता है। जांच एजेंसी का आरोप है कि इस मामले में उसे कथित तौर पर प्रमुख लाभार्थी की भूमिका में पाया गया है। उस पर सरकारी अस्पतालों और स्वास्थ्य संस्थानों के लिए मेडिकल सामान की खरीद से जुड़े टेंडर को प्रभावित करने तथा कथित फर्जी कंपनियों के माध्यम से पूरी प्रक्रिया को अपने पक्ष में मोड़ने का आरोप है।राजीव रंगीला का राजनीतिक अतीत भी रहा है। उसने 2014 में हरियाणा की करनाल विधानसभा सीट से निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ा था, हालांकि उसे हार का सामना करना पड़ा था।
कागजों पर अलग मालिक, संचालन का आरोप रंगीला पर
ACB की जांच में कई कंपनियों की भूमिका सामने आई है। एजेंसी का आरोप है कि टेंडर प्रक्रिया में प्रभाव बनाने के लिए ऐसी कंपनियों का इस्तेमाल किया गया, जिनके दस्तावेजों में मालिक के तौर पर अलग-अलग लोगों के नाम दर्ज थे। इनमें रंगीला के कर्मचारियों और चाय बेचने वाले लोगों के नाम इस्तेमाल किए जाने का भी आरोप है।जांच के दायरे में एफ मेड डिवाइसेज, टेक्नोक्रेट्स, राजश्री, आशी सर्जिकल एंड फार्मास्यूटिकल्स और एम साहिब एंड संस प्राइवेट लिमिटेड समेत कई कंपनियां हैं। एजेंसी का दावा है कि कागजों पर भले ही इन कंपनियों के संचालक अलग दिखाई देते थे, लेकिन वास्तविक नियंत्रण रंगीला के पास था।
टेंडर की शर्तों में कथित हेरफेर
जांच एजेंसी के मुताबिक, रंगीला पर मेडिकल उपकरण निर्माताओं के साथ कथित सांठगांठ कर कीमतें तय करने और इसके बदले नकद भुगतान की व्यवस्था करने का आरोप है। आरोप यह भी है कि कुछ चुनिंदा कंपनियों को फायदा पहुंचाने के उद्देश्य से टेंडर में ऐसी तकनीकी शर्तें और उत्पाद संबंधी मानक शामिल किए गए, जिनसे प्रतिस्पर्धी कंपनियों के लिए बोली प्रक्रिया में शामिल होना कठिन हो जाए।जांच के अनुसार, तैयार किए गए दस्तावेज सेंट्रल प्रोक्योरमेंट एजेंसी (CPA) के मुख्यालय में डॉ. विनोद कुमार रंगा तक पहुंचाए गए। आरोप है कि इन्हें बाद में टेंडर कमेटी के समक्ष रखा गया और समिति के सदस्यों पर कथित दबाव बनाकर संबंधित शर्तों को मंजूरी दिलाई गई।
CPA और DGHS के अधिकारियों पर भी कार्रवाई
इस मामले में जांच एजेंसी पहले ही कई अधिकारियों को गिरफ्तार कर चुकी है। CPA प्रमुख डॉ. विनोद कुमार रंगा की गिरफ्तारी 18 जून को हुई थी। इसके बाद 27 जून को पूर्व डायरेक्टर जनरल ऑफ हेल्थ सर्विसेज (DGHS) प्रमुख डॉ. वत्सला अग्रवाल को गिरफ्तार किया गया। डिप्टी कंट्रोलर ऑफ अकाउंट्स (DCA) नीरज चोपड़ा भी गिरफ्तार आरोपियों में शामिल हैं।एजेंसी का आरोप है कि डॉ. अग्रवाल ने टेंडर की कथित रूप से बदली गई शर्तों को अंतिम स्वीकृति दी थी।
शिकायतों के बाद जांच ने पकड़ा जोर
करीब 700 करोड़ रुपये की खरीद से जुड़ा यह कथित मामला मई में सामने आया। विभिन्न शिकायतों के बाद विजिलेंस विभाग ने CPA से जुड़े कार्यालयों पर कार्रवाई की। इसके बाद दस्तावेजों और टेंडर प्रक्रिया की जांच आगे बढ़ी और कथित अनियमितताओं की परतें खुलने लगीं।जून से एजेंसी की नजर में था रंगीलाजांच में शामिल अधिकारियों के अनुसार, ACB ने रंगीला को पूछताछ के लिए जुलाई में कई बार नोटिस जारी किए थे, लेकिन वह पेश नहीं हुआ। इसके बाद दिल्ली-NCR के साथ उत्तराखंड में भी उसकी तलाश की गई। जांचकर्ताओं को दिल्ली, हरियाणा और उत्तराखंड में उसकी कथित अचल संपत्तियों के बारे में जानकारी मिली है।
अधिकारियों के मुताबिक, अदालत की प्रक्रिया के बाद उसे फरार आरोपी घोषित किया गया था और उसकी संपत्तियों को जब्त करने की कार्रवाई की तैयारी चल रही थी। इसी बीच रंगीला ने गुरुवार को ACB के सामने आत्मसमर्पण कर दिया। अब जांच एजेंसी उसकी भूमिका के साथ-साथ इस पूरे कथित खरीद नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों और कंपनियों की भूमिका की भी पड़ताल कर रही है।
हैदरबाद से विश्वनाथ देहाती की रिपोर्ट